में अकिब नबी, बारामूला के छोटे से गाँव सिरी का रेहने बाला 4 नबम्बर 1996 को जन्मा एक साधारण लड़का, जिसके पिता गुलाम नबी डार सरकारी स्कूल में अंग्रेजी पड़ाते थे|उनकी सबसे बड़ी ख्बाहिश थी की बेटा डॉक्टर बनें, सफेद कोट पेहने और सुरक्षित भविस्य पाए|लेकिन मेरा दिल हमेशा मैदान पर धड़कता था|
बचपन में बारामूला मे कोई क्रिकेट ग्राउंड नही था| सड़को पर स्कूल के छोटे ग्राउंड पर या कर्फ्यू के दिनों मे घर के आंगन में कुर्सी को बल्लेबाज मान कर गेदबाजी करता था| टेनिस बॉल से खेलना सुरु किया था पँचमी छटी कक्षा मे था तभी दक्षिण अफ्रीका के तेज गेदबाज डेल स्टेन को देखा तो मन में एक सपना जग गया उनकी रफ्तार स्वीग और विकिट लेने का अंदाज सब कुछ कबिता जैसा लगता था|
मेनें ठान लिया था एक दिन मे भी तेज गेदवाद बनूगा और टीम इंडिया के लिए खेलूंगा|पिता जी को ये सब पसंद नहीं था क्रिकेट खेलने पर बहुत डाट पड़ती थी|कभी कमरे में बंद कर देते तो कभी पड़ाई पर जोर देते| आठमी कक्षा मै जोंन टॉपर था में पड़ाई अच्छी थी लेकिन दिल मैदान पर था|दोस्तो के उधार पैसे लेकर ट्रायल देने जाता था पहली बार ट्रायल में स्पाईक्स नही थे सिर्फ 500 रुपए के स्पोट्स सूज उधार लिए| 2 तीन साल ट्रायल में लगातार फेल हुए लेकिन हार नही मानी|
2026 में आखिरी अंडर -19 साल में कोच बिहार ट्रॉफि के लिए चुना गया तब तय हो गया ये मेरा रास्ता है अंडर 23 मे कुछ शाल खेला 2018 मे इरफन पठान भाई ज़म्बू कस्मीर टीम के मेंटोर बनें|उन्होंने मेरी लम्बी स्पेल डालने की छमता देखी और सीनियर टीम में डेब्यू कराने मे मदत की| उनके टिप्स आज भी काम आते हैं|2020 मे रणजी ट्रॉफि डेब्यू किया|

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