मध्य प्रदेश के इंदौर से ताल्लुक रखने वाले सारांश जैन का नाम आज पूरे क्रिकेट जगत में चर्चा का विसय बना हुआ है | 33 साल की उम्र में उन्होंने पहला अपना भारत कॉल- अप हासिल किया है |श्रीलंका में दो टेस्ट मैचों की सीरीज टीम इंडिया में जगय बनाने वाले सारांश जैन ओलराउडर की कहानी काफी मेहनत धेर्य और परिवार के अटूट सहयोग की है
कौंन है सारांश जैन ?
सारांश सुबोध जैन का जन्म 31 मार्च 1993 मे इंदौर में हुआ बे बाय हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और दाय हाथ से गेदबाजी करते हैं |फस्ट क्लास क्रिकेट में अब तक 54 मैच खेल चुके सारांश ने अबतक 2223 रन 31.75 की औसत से बनाय है| जिनमें दो सतक और 14 अर्ध सतक सामिल है |गेदबाजी मे उन्होंने अब तक 188 बिकिट 27.30 की औसत से जिनमें 10 पाँच विकिट के शिकार सामिल है |
बे मध्य प्रदेश के लिए खेलते हैं |और इंडिया पोस्ट मै नोकरी भी करते हैं | IPL मे मौका न मिलने पर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में काफी अच्छा प्रदर्शन करने के बाध टीम इंडिया में अपनी जगय बनाई है|
परिबार और प्रेडना की कहानी
सारांश के पिता सबोध जैन खुद मध्य प्रदेश के फस्ट क्लास क्रिकेटर रह चुके है |उन्होंने अपने बेटे को कोचिंग दी सारांश के बड़े भाई भी क्रिकेट खेलते थे लेकिन परिबार का सपना सारांश ने पूरा किया |
2014 जब सारांश आस्ट्रेलिया में क्लब क्रिकेट खेल रहे थे, तब उनके पिता को ओरल केंसर का पता चला | परिबार ने यह बात अपने बेटे को नही बताई ताकि बो क्रिकेट पर फोकस कर सके| लोटने पर जब सारांश ने अपने पिता को देखा तो बो टूट गए|पिता, जो सर्जरी के बाद बोल नही पा रहे थे, सारांश के पिता ने कागज पर लिखा बेटा तू जितना अच्छा करेगा मे उतना जल्दी ठीक हो जाऊगा|यह नोट आज भी सारांश के पास है और उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है|
घरेलू क्रिकेट में चमक
सारांश ने 2014-15 मे रणजी ट्राफी डेब्यू किया लेकिन असली पहचान 2022 मे मिली | मध्य प्रदेश के पहले रणजी खिताब मे उन्होंने नॉकाउट चरणों में 13 विकिट लिए और फाइनल में अर्ध शतक जडा|2022-23 में 360 रन और 35 विकिट लेकर उन्होंने लाल अमरनाथ अबॉर्ड [वेस्ट ऑलराउंडर] अबॉर्ड जीता |
सबसे शांदार पृदर्शन 2025-26 रणजी ट्रॉफि मे रहा 518 रन 57.55 की औसत के साथ 30 बिकिट 20.43 की औसत दलीप ट्रॉफि मे सेंट्रल जोंन के लिए प्येयर ऑफ दा सीरीज |सिर्फ दो मैचों में 16 विकिट और दो अर्ध शतक | इंडिया ए और श्रीलंका ए मे भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया|
टीम इंडिया में जगह
वॉशिंगटन सुंदर के चोट के कारण टीम इंडिया में जगह खुली रविंद्र जडेजा, मानव सुधार, कुलदीप यादव, के साथ सारांश अकेले ऑफ स्पिनर के रूप मे स्कॉट मै शामिल हैं|अगर बे डेब्यू करते है तो 1998 मे रोविन् सिंह के बाद 33 साल से उपर मै डेब्यू करने वाले पहले भारतीय खिलाडी बन जायेंगे|
आर अश्विन उनके रोल मॉडल है बे कहते है अश्विन जैसी लगन के साथ खेलना चाहते है|
प्रेणना का स्त्रोत
सारांश की कहानी बताती हैं कि उम्र कोई बाधा नहीं है 11 साल की मेहनत घरेलू क्रिकेट मे करने के बाद मिला यह मौका उन सभी खिलाडियों के लिए प्रेडना है जो चुप चाप मेहनत कर रहे है परिबार का साथ पिता का नोट और खुद का धेर्य -यही सारांश जैन की सफलता का राज है|
श्रीलंका दौरे पर उनकी नजर अब भारत के लिए इतिहास रचने पर होंगी|सारांश जैन साबित कर रहे है कि सपने कभी देर से नही पूरे होते, बस इंतजर करना आता हो|
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